भारत की शिक्षा व्यवस्था



पुराने समय में बच्चे पढ़ाई के लिए गूरु के घर जाते थे और यदि गुरु शिक्षा देने के लिए तैयार हो जाता था तो बच्चे गुरु के घर पर रहकर उनके घर के काम में सहायता किया करते थे और शिक्षा ग्रहण करते थे। जिससे गुरु और शिष्य के बीच बहुत प्रगाढ़ संबंध बनता था तथा शिष्य पढ़ाई के साथ साथ घर कैसे चलाया जाता है, यह भी सीख जाते थे। गुरु शिष्यों को संस्कृत, धार्मिक ग्रन्थ, गणित, अध्यात्म जो भी वे सीखना चाहें सीखाता था। सब कुछ प्रकृति और जीवन के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ था। उसमें वर्तमान की तरह कुछ भी कक्षा में बैठकर याद करने के लिए नहीं था।

मॉडर्न स्कूल सिस्टम और इंग्लिश India में Lord Thomas Babington Macaulay द्वारा सन 1830 में लाया गया और पाठ्यक्रम को विज्ञान और गणित जैसे "आधुनिक" विषयों तक सीमित कर दिया गया तथा अध्यात्मविज्ञान (metaphysics) और दर्शनशास्र (philosophy) जैसे विषयों को अनावश्यक माना गया। शिक्षा क्लासरूम तक सिमित हो गई उसका प्रकृति और गुरु के साथ का घनिष्ठ सम्बन्ध टूट गया। 

India में education policies and programs को राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार द्वारा बनाया जाता है, हालांकि राज्य सरकारों को इन नीतियों और कार्यक्रमों को लागु करने की पूर्ण रूप से स्वतंत्रता है।India में एक national organization है जो एजुकेशन पॉलिसीस और प्रोग्राम को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसे राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training ) कहा जाता है। इस संस्था को NCERT के नाम से भी जाना जाता है।

इसके समकक्ष प्रत्येक राज्य का अपना राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (State Council of Educational Research and Training) भी है। इसको SCERT के नाम से भी जाना जाता है।

SCERT आमतौर पर NCERT द्वारा स्थापित दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। लेकिन राज्यों को शिक्षा प्रणाली को लागू करने की स्वतंत्रता है।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार, India में स्कूली शिक्षा 6 से 14 साल तक की आयु वर्ग के सभी बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य है। भारतीय शिक्षा प्रणाली 10+2 पैटर्न का पालन करती है। जिसके चार स्तर हैं: lower primary (आयु 6 से 10, क्लास 1-5), upper primary (आयु11 - 13, क्लास 6-8), high (आयु 14 -15, क्लास 9-10) और higher secondary (आयु 16-17, क्लास 11-12). और higher secondary के बाद 3 साल की bachelor's degree for college होती है।

Type Of School

छोटे बच्चों के लिए विद्यालय (Play school): आजकल शहरों में बच्चों को प्राइमरी स्कूल से पहले play school में भेजने का प्रचलन है। यहाँ 2-3 साल तक के बच्चे जाते हैं। Play School में बच्चों को कोई formal education नहीं दी जाती। यहाँ बच्चों के खेलने के लिए बहुत सी activities होती हैं। यहाँ बच्चे खेल-खेल में सीखते हैं।

सरकारी विद्यालय (Government School): भारत में सरकारी स्कूलों की संख्या बहुत अधिक है, ये न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों तक फैले होते हैं।इनका संचालन केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। ये सभी day तथा Residential school होते हैं। Day school की तुलना में residential school की संख्या काफी कम है। ये सभी CBSE affiliated होते हैं और CBSE पाठ्यक्रम का अनुपालन करते हैं। सरकारी स्कूलों की फीस भी बहुत कम होती है। कुछ स्कूलों में तो सरकार द्वारा किताबें, ड्रेस तथा भोजन की व्यवस्था भी की जाती है।

गैर सरकारी विद्यालय (Private School): भारत में सरकारी स्कूलों के साथ-साथ बहुत सारे प्राइवेट स्कूल भी हैं, जिनका संचालन निजी संस्था द्वारा किया जाता है। ये day तथा Residential school होते हैं। ये स्कूल CBSE तथा CICSE affiliated होते हैं। सरकारी स्कूलों की तुलना में इन स्कूलों की फीस ज्यादा होती है।

सैनिक स्कूल (Sainik School): ये स्कूल Sainik School Society द्वारा चलाए जाते हैं, जो Ministry of Defense के अंतर्गत आती है। ये सभी residential (आवासीय) स्कूल होते हैं। यहाँ सभी बच्चे स्कूल कैंपस में ही रहते हैं। सैनिक स्कूल में एडमिशन 6th और 9th में होता है, इस दौरान बच्चे की आयु 10 से 12 वर्ष और 13 से 15 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिये। ये सभी CBSE affiliated होते हैं और CBSE पाठ्यक्रम का अनुपालन करते हैं। सैनिक स्कूल में बच्चों को NDA (National Defense Academy ) में प्रवेश के लिए तैयार किया जाता है। भारत में लगभग 33 सैनिक स्कूल हैं। ये स्कूल defense में कारयर्रत कर्मचारियों के बच्चों को ही admission देते हैं परन्तु कुछ सीट्स Civilians के लिए भी होती हैं हालाँकि उनकी संख्या बहुत ही कम होती है। इन स्कूलों में सीट्स cedar, state तथा region के आधार पर रिज़र्व होती हैं। सैनिक स्कूल में admission written test और medical टेस्ट के आधार पर होता है। जो बच्चे written test में पास हो जाते हैं उन्हें मेडिकल टेस्ट के लिये बुलाया जाता है। ये स्कूल केवल लड़कों के लिए ही होते हैं परन्तु हाल ही में कुछ स्कूलों ने लड़कियों को भी admission देना प्रारम्भ किया है।

मिलिट्री स्कूल (Military School): ये भी सैनिक स्कूल की तरह Residential School होते हैं। Military school में admission defense में कारयर्रत कर्मचारियों के बच्चों का ही होता है परन्तु कुछ सीट्स Civilians के लिए भी होती हैं। ये सभी CBSE affiliated होते हैं और CBSE पाठ्यक्रम का अनुपालन करते हैं। भारत में लगभग 5 Military school हैं। इन स्कूलों में admission 7th class में written test और medical test के आधार पर होता है।

जवाहर नवोदय विद्यालय (Jawahar Navodaya Vidalaya): ये सरकार द्वारा चलाए जा रहे residential school हैं। ये सभी स्कूल CBSE affiliated होते हैं। इन स्कूलों को बनाने का उद्देश्य सर्वश्रेष्ठ ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे लाने का था। ये स्कूल कक्षा 6-12 तक होते हैं। इनमें कम से कम 75 % सीटें ग्रामीण बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं।

केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidalaya): केंद्रीय विद्यालय को KVS के नाम से भी जाना जाता है। पहले KVS को Central school के नाम से भी जाना जाता था। ये सभी Day School होते हैं, जो Ministry of HRD के अंतर्गत आते हैं। भारत में लगभग 1200 तथा विदेश में 3 KVS school हैं। ये सभी CBSE affiliated होते हैं और CBSE पाठ्यक्रम का अनुपालन करते हैं। KVS स्कूलों की स्थापना Central Govt. के उन कर्मचारियों जिनका ट्रांसफर होता रहता था के बच्चों के लिए की गई थी। KVS में सभी स्कूलों की study का एक जैसा ही schedule होता है जिससे यदि कोई बच्चा एक स्कूल से दुसरे स्कूल में जाता है तो उसकी पढ़ाई में कोई फर्क नहीं पड़ता।

Education Board:

भारत में मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा के 3 बोर्ड हैं.

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education): CBSE बोर्ड की स्थापना 1962 में भारत सरकार की Ministry of HRD द्वारा की गई थी। यह भारत सरकार द्वारा नियंतित्र राष्ट्रीय स्तर का बोर्ड है। सभी सरकारी तथा बहुत से गैर सरकारी स्कूल इससे सम्बद्ध (Affiliated) हैं। इसके अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों को NCERT पाठ्यक्रम का पालन करना होता है। भारत में लगभग 20000 तथा विदेश में 200 स्कूल हैं जो इस बोर्ड से सम्बद्ध हैं।

यह वर्ष में मुख्य रूप से 2 परीक्षायें संचालित करता है। कक्षा 10 के लिए SSC (Secondary School Examination) और कक्षा 12 के लिए SSCE (Senior Secondary School Examination) इसके अतिरिक्त ये अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (AIEEE) तथा अखिल भारतीय प्री मेडिकल परीक्षा (AIMPT) का भी संचालन करता है।

Council for the Indian School Certificate Examinations: CISCE एक गैर सरकारी राष्ट्रीय स्तर का बोर्ड है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। जिसका मुख्य उद्देश्य पुरानी Univeristy of Cambridge Examination को All India Examination के अंतर्गत लाने के लिए किया गया था।इसका मुख्यालय दिल्ली में है। यह वर्ष में मुख्य रूप से 2 शिक्षायें संचालित करता है।

कक्षा 10 के लिए Indian Certificate of Secondary Education (ICSE ) और कक्षा 12 के लिए Indian School Certificate (ISCE)।

National School of open Schooling: NIOS बोर्ड की स्थापना 1989 में भारत सरकार के Ministry of HRD द्वारा की गई थी। यह बोर्ड भी CBSE और CISCE की भांति माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की परीक्षा संचालित करता है। इसकी स्थापना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ स्कूल की सुविधा नहीं है या ऐसे लोग जो किसी कारणवश अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए उन्हें औपचारिक रूप से सस्ती लेकिन गुणवता की शिक्षा प्रदान करना था। NIOS के सेंटर भारत के आलावा विदेश में भी हैं।

ये स्कूल Regular नहीं होते, शिक्षार्थी सेंटर द्वारा दिए गए study material की सहायता से self learning करता है।

State Board: ऊपर बताए गए बोर्डों के आलावा भारत में हर स्टेट का अपना बोर्ड भी होता है, जो 10th और 12th की परीक्षा लेता है।

भारत में सबसे पुराण बोर्ड UP Board है जिसकी स्थापना सन 1922 में हुई थी।

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