घर के निर्माण में ईशान कोण का महत्व

 


यदि घर का निर्माण वास्तु के अनुसार कराया जाये तो घर बहुत ही सुखदायी और प्रगतिशील होगा। वास्तु के अनुसार घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान ईशान कोण (Ishan Kon) होता है। यदि इस कोण में किसी प्रकार की त्रुटि हो तो जीवन में सदैव सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है।

उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा को वास्तु में ईशान कोण कहा जाता है। इस दिशा के देव भगवान शिव और स्वामी ग्रह बृहस्पति है।

यह स्थान सभी पवित्र कार्यों जैसे पूजा-पाठ,अध्ययन,मेडिटेशन आदि के लिए अच्छा माना जाता है। इस स्थान को हमेशा साफ़-सुथरा और हल्का-फुल्का एवं खुला रखना चाहिए क्योंकि यहां से सकारात्मक ऊर्जाएं भवन के अंदर प्रवेश करती हैं। इस दिशा में किसी भी प्रकार का दोष होने पर धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है साथ ही सौभाग्य में भी कमी आती है।

ईशान कोण में क्या करें:

  • इस स्थान को सदा स्वच्छ और पवित्र रखें।
  • इस स्थान में पीले रंग का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • इस स्थान में पूजाघर बनवाया जा सकता है।
  • यह स्थान धन, स्वास्थ्य ऐश्वर्य, और वंश में वृद्धि कर उसे स्थायित्व देता है।
  • यह स्थान जल के स्रोत के लिए भी उत्तम होता है इसलिए यहां कुआं, बोरिंग, मटका आदि का होना सर्वोत्तम माना गया है।
  • वास्तु के अनुसार इस दिशा में खिड़कियां और दरवाजे बनवाया जाना बहुत शुभ माना गया है।
  • ईशान कोण को सदैव खुला रखना चाहिए ताकि सूर्य की अधिकतम ऊर्जा हमारे भवन में प्रवेश कर सके।
  • बच्चों के पढ़ने का कमरा ईशान कोण में होना अच्छा होता है। इससे बच्चों का ध्यान पढ़ाई में केंद्रित होता है।

 ईशान कोण में क्या न करें:

  • घर के ईशान कोण पर शौचालय नहीं बनाना चाहिए. ऐसा करने से शारीरिक और मानसिक कमजोरी बनी रहती है। जिसके चलते इलाज में जमापूंजी खर्च हो जाती 
  • घर के ईशान कोण पर नव दम्पत्ति का बेडरूम नहीं होना चाहिए। क्योंकि विवाहित जोड़ों के लिए यह दिशा अच्छी नहीं मानी जाती। ऐसा करने वैवाहिक जीवन में मन मुटाव बना रहता है।
  • इस स्थान पर कभी जूते चप्पल नहीं रखने चाहिए।
  •  ईशान कोण में सीढ़ियां या चबूतरा नहीं बनवाना चाहिए।
  •  यहां तुलसी का पौधा किसी गमले में लगाकर रख सकते हैं।
  •  इस स्थान पर घर का कबाड़ रखने से भी अशुभ फल मिलता है। 
  •   इस स्थान पर टॉयलेट वास्तु की दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है। ऐसा होने से परिवार में अशांति,जटिल रोग और अनैतिक कार्यों से धन सम्मान की हानि होने की संभावना रहती है। यदि भवन के ईशान कोण में टॉयलेट है तो उसे स्थाई रूप से बंद करना या फिर केवल बाथरूम के रूप में उपयोग करना ही बेहतर है। यदि इस स्थान पर टॉयलेट है तो टॉयलेट में कांच के एक बाउल में समुद्री नमक या फिटकरी के टुकड़े रखें।
  •   ईशान कोण में रसोईघर का निर्माण भी नहीं करना चाहिए। इससे अनेक प्रकार के संकट उत्पन्न होते हैं।


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